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हरिद्वार: जहाँ नदी प्रार्थना बन जाती है

एक कॉफी टेबल फीचर गंगा का पहला आलिंगन नदियाँ संसार में अनेक हैं, परन्तु गंगा केवल एक है। हिमालय की हिमाच्छादित चोटियों से निकलकर जब गंगा मैदानी भारत में प्रवेश करती है, तो उसका पहला महान आध्यात्मिक पड़ाव हरिद्वार बनता है। यहाँ जल केवल जल नहीं रहता; वह आस्था, स्मृति और सभ्यता का प्रतीक बन जाता है। करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए हरिद्वार कोई साधारण नगर नहीं, बल्कि आत्मा और अनन्त के बीच संवाद का एक पवित्र स्थल है। ‘हरिद्वार’ का अर्थ है—‘हरि का द्वार’ और ‘हर का द्वार’। यह नाम स्वयं इस नगर की उस अद्वितीय आध्यात्मिक पहचान को प्रकट करता है, जहाँ वैष्णव और शैव परंपराएँ समान रूप से समाहित होती हैं। शिवालिक पर्वतमालाओं की गोद में स्थित यह नगर वह स्थान है जहाँ गंगा पर्वतों को छोड़कर भारतीय मैदानों की ओर अपनी दीर्घ यात्रा आरम्भ करती है। हर की पौड़ी : आस्था की धड़कन हरिद्वार का हृदय है—हर की पौड़ी। गंगा के तट पर बने ये घाट केवल पत्थरों की सीढ़ियाँ नहीं हैं, बल्कि सदियों से चल रही भारतीय आध्यात्मिक चेतना के जीवंत साक्षी हैं। यहाँ साधु-संतों की तपस्या, श्रद्धालुओं की प्रार्थनाएँ, बच्चों की उत्सु...

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